लोहड़ी त्यौहार पर गाये जाने वाले प्रसिद्ध गीत, लोहड़ी गीत

लोहड़ी गीत, इस (लोहड़ी) त्यौहार के बहुत महत्वपूर्ण अंग हैं। लोहड़ी का त्यौहार हमारे उत्तर भारत के कुछ खास त्योहारों में से एक है। यह त्यौहार मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व मनाया है। मुख्यतः यह पंजाबियों का त्यौहार है लेकिन इसे उत्तर भारत में पंजाब; दिल्ली; मुम्बई; हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों के लोग भी इसे पूरे उत्साह के साथ मानते हैं।

लोहड़ी फ़सलों का त्यौहार है। ऐसा माना जाता है कि यह सर्दियों मे उस दिन मनाया जाता है जब दिन साल का सबसे छोटा दिन और रात साल की सबसे बड़ी रात होती है। इस दिन पंजाबियों के लिए नए साल की शुरुआत होती है। इस दिन लड़के जहां भांगड़ा पाते हैं, वहीं लड़कियां और महिलाएं गिद्धा नृत्य करतीहैं। लोहड़ी के अलाव के आसपास लोग इकट्ठे होकर दुल्हा बत्ती का प्रशंसा गायन भी करते हैं, जो पंजाब के लोक पात्र है।

लोहड़ी गीत

‘लोहड़ी’ का अर्थ-

ल (लकड़ी) +ओह (गोहा = सूखे उपले) +ड़ी (रेवड़ी) = ‘लोहड़ी’ ..का यह मतलब होता है। लेकिन कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि लोहड़ी शब्द “लोई” (संत कबीर की पत्नी) से उत्पन्न हुआ था।और कुछ लोग तो ऐसा भी मानते हैं कि यह शब्द “लोह” (चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त उपकरण) से उत्पन्न हुआ है। इस दिन बॉनफायर की तरह आग का एक अलाव जलाकर उसके इर्दगिर्द नृत्य किया जाता है।

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किसी भी त्यौहार को पुरे उत्साह से मानाने के लिए हमें चाइये कुछ रोचक गीत और गाने जो उस त्यौहार की शोभा बढ़ाएं। और लोहड़ी के खास अवसर पर हम आपके लिए लाये हैं लोहड़ी मे गाये जाने वाले प्रसिद्ध लोहड़ी गीत। आशा है कि आपको ये पसंद आएंगे।

लोहड़ी त्यौहार पर गाये जाने वाले प्रसिद्ध लोहड़ी गीत-

सुन्दर मुंदीरये हो, तेराकोणविचाराहो।

दूल्हा भट्टी वाला हो, दूल्हेदीतीहविहाइहो।

सेर शक्कर पाई हो, कुड़ीदालालपटाखाहो।

कुड़ी दा सालु पाटा हो, सालुकोनसमेटे।

चाचे चुरी कुट्टी, ज़मीदारांलुट्टी।

ज़मीदार सुधाये, बड़ेभोलेआये।

एक भोला रह गया, सिपाहीफाड़केलैगया।

सिपाही ने मारी इट,

सानू दे दे लोड़ी, तेरीजीवेजोड़ी।

पांवें रो ते पावें पिट।

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मक्की दा दाना, आना लै के जाना।

हुल्लेहुल्लारे

असि गंगा चले, सास सोरा चले,

जेठ जेठाणी चले, देयोर दरानी चले,

परी छौंकन चली, हुल्लेहुल्लारे।

असि गंगा पुहंचे, सास सोरा पुहंचे ,

जेठ जेठाणी पुहंचे, देयोर दरानी पुहंचे,

परी छौंकन पुहंची, हुल्ले हुल्लारे।

असि गंगा नहाते, सास सोरा नहाते,

जेठ जेठाणी नहाते, देयोर दरानी नहाते,

परी छौंकन नहाती, हुल्ले हुल्लारे।

छौंकन पैली पोड़ी, छौंकनदुजीपोड़ी

छौंकन तिजी पोड़ी, मिंटीतक्कादिता

छौंकनविच्चेरूढ़गई।

हुल्लेहुल्लारे

सास सोरा रोंण, जेठ जेठाणी रोंण,

देयोर दरानी रोंण, पियाराओविरोवे।

मैं केहा तुसी क्योँ रौंदे, त्वाडेजोगिमैंबथेरी।

मिनु देयो वदहीयाँ जी, हुल्ले हुल्लारे।

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हुल्ले नि माए हुल्ले, दोबेरीपत्तेझुल्ले।

दो झुल पईआं खजूरां, खजूरां सुट्ट्या मेवा।

एस मुंडे दे घर मांगेवा, एसमुंडेदीवोट्टीनिक्की।

ओह ! खांदी चुरी कुट्ट दी, कुट ! कुट ! परयाथाल।

रोटी बनावे नन्ना नाल, नन्नातेवड्डीपरजाई।

सो कुडम दे घर आई, मैंलोड़ीलेनआयी।

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लो आ गयी लोड़ी वे,

बना लौ जोड़ी वे,

कलाई कोई यू थामो, ना जावे छोड़ी वे,

नाजावेछोड़ीवे

छूठ ना बोली वे,

कुफर ना टोली वे,

जो तुने खायी थी कसमे, इक इक तोड़ी वे,

इकइकतोड़ीवे

लो आ गयी लोड़ी वे,

बना लो जोड़ी वे..

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साली पैरां जुत्ती, जीवे साहिब दी कुत्ती।

कुत्ती नु निकल्या पूराह, जीवे साहिब दा घोड़ा।

घोड़े उत्ते काठी, जीवे साहिब दे हाथी।

हाथी ने मारया पाद, दे माये दाण्यां दा छाझ।

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