नोबेल विजेता डॉ॰ मार्टिन लूथर किंग जूनियर जीवनी, जीवन परिचय

डॉ॰ मार्टिन लूथर किंग जूनियर अमेरिका के एक महान धर्म सुधारक, मानवतावादी, समाज सुधारक, आन्दोलनकारी एवं अफ्रीकीअमेरिकी नागरिक अधिकारों के संघर्ष के प्रमुख नेता थे। उन्हें अमेरिका का गांधी भी कहा जाता है। उन्होंने मानवमानव के बीच किये जाने वाले अपमानजनक, अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध केवल जन जागृति लायी, वरन् उनके सम्मान में वृद्धि की

उनके प्रयत्नों से अमेरिका में नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में प्रगति हुई; इसलिये उन्हें आज मानव अधिकारों के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। दो चर्चों ने उनको सन्त के रूप में भी मान्यता प्रदान की है। इसलिए आज हम आप सभी के सामने लाये हैं डॉ॰ मार्टिन लूथर किंग जूनियर जीवनी और उनका जीवन परिचय।

मार्टिन लूथर किंग जूनियर

मार्टिन लूथर किंग जूनियर – जन्म और शिक्षा

डॉ॰ मार्टिन लूथर किंग जूनियर का का जन्म सन्‌ 1929 में अमेरिका के शहर अट्लांटा में हुआ था। उनके पिता और माता का नाममार्टिन लूथर किंग सीनियर और अल्बर्टा विल्लियम्स किंग था।उनका कानूनी तौर पर नाम माइकल किंग था। इनके परिवार में यह दूसरे स्थान पर थे, इनसे बड़ी इनकी एक बहन थी और एक छोटा भाई।

किंग जूनियर ने अपनी डॉक्टर की पढ़ाई बोस्टन यूनिवर्सिटी से की और 5 जून 1995 ई. में उन्होंने P.hd की मान्यता प्राप्त की।डॉक्टरी की पढ़ाई करते करते उन्होंने विलियम हंटर हेस्टर के साथ असिस्टेंट मिनिस्टर का भी काम किया।

मार्टिन लूथर किंग जूनियर – प्रसिद्ध आंदोलन

डॉ॰ मार्टिन लूथर किंग ने अमेरिका में नीग्रो समुदाय के प्रति होने वाले भेदभाव के विरुद्ध सफल अहिंसात्मक आंदोलन का संचालन किया। सन्‌ 1955 का वर्ष उनके जीवन का निर्णायक मोड़ था। इसी वर्ष उनका विवाह कोरेटा से हुआ, उनको अमेरिका के दक्षिणी प्रांत अल्बामा के मांटगोमरी शहर में डेक्सटर एवेन्यू बॅपटिस्ट चर्च में प्रवचन देने बुलाया गया और इसी वर्ष मॉटगोमरी की सार्वजनिक बसों में कालेगोरे के भेद के विरुद्ध एक महिला श्रीमती रोज पार्क्स ने गिरफ्तारी दी।

इसके बाद ही डॉ॰ मार्टिन लूथर किंग ने प्रसिद्ध बस आंदोलन चलाया। यह आंदोलन 381 दिनों तक चला जिसके बाद अमेरिका की बसों में काले गोरे यात्रियों की अलग अलग सीटों का प्रावधान खत्म कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने समान नागरिक कानून आंदोलन अमेरिका के उत्तरी भाग में भी फैलाया, इसमें उनका साथ धार्मिक नेताओं ने दिया।

मार्टिन लूथर किंग जीवनी

28 अगस्त 1963 को मार्टिन लूथर किंग जूनियर के नेतृत्व में एक मार्च निकाला गया जिसमें रोजगार और पब्लिक स्कूलों में हो रहे नस्लीय भेदभाव पर रोक लगाने एवं विचारशील नागरिक अधिकार कानून में नस्लीय अलगाव की विविधत अंत करने की मांग की , साथ ही सभी श्रमिकों के लिए नागरिक अधिकार कानून में और 2 $ को नुन्यतम मज़दूरी की जरुरत को भी रखा गया।

इस सफल मार्च के साथ लिंकन स्मारक पर मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने “आई हेव ए ड्रीम” भाषण दिया। सन्‌ 1964 में विश्व शांति के लिए सबसे कम उम्र मे नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया। अमेरिका के कई विश्वद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधियां दीं। सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं ने उन्हें मेडल दिए। सन्‌ 1963 में टाइमपत्रिका ने उन्हें “मैन ऑफ द इयर” चुना था।

मार्टिन लूथर किंग की जूनियर – भारत यात्रा

मार्टिन लूथर किंग जूनियर, महात्मा गांधी के अहिंसक आंदोलन से बहुत प्रभावित थे। गांधी जी के आदर्शों पर चलकर ही डॉ॰ किंग ने अमेरिका में इतना सफल आंदोलन चलाया, जिसे अधिकांश गोरों का भी समर्थन मिला। उन्होंने सन्‌ 1959 में भारत की यात्रा की। उन्होंने अखबारों में कई आलेख लिखे। ‘स्ट्राइड टुवर्ड फ्रीडम (1958) तथा ‘व्हाय वी कैन नॉट वेट (1964) उनकी लिखी दो पुस्तकें हैं। सन्‌ 1957 में उन्होंने साउथ क्रिश्चियन लीडरशिप कॉन्फ्रेंस की स्थापना की थी।

डॉ॰ किंग की प्रिय उक्ति थीहम वह नहीं हैं, जो हमें होना चाहिए और हम वह नहीं हैं, जो होने वाले हैं, लेकिन खुदा का शुक्र है कि हम वह भी नहीं हैं, जो हम थे। 4 अप्रैल 1968 को अमेरिका के एक होटल में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमें आशा है कि आपको मार्टिन लूथर किंग जूनियर जीवनी पढ़कर अच्छा लगा होगा। उनसे जुड़ी और भी बातों और विचारों को जानने के लिए बने रहे हमारे साथ।

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